स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण: बुनियादी बातें
अपडेट 1 सित॰ 2026 · 4 मिनट
स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क क्या हैं, कैसे गिने जाते हैं, और अपने राज्य की दर कहाँ देखें।
भारत में संपत्ति खरीदते समय आप राज्य सरकार को स्टांप ड्यूटी और बिक्री को आधिकारिक रूप से दर्ज कराने के लिए पंजीकरण शुल्क देते हैं। ये फ्लैट या प्लॉट की कीमत के ऊपर लगते हैं और हर राज्य इन्हें खुद तय करता है।
कैसे गिना जाता है
स्टांप ड्यूटी अनुबंध मूल्य और उस इलाके के सरकारी रेडी रेकनर / सर्किल रेट में से जो ज़्यादा हो, उसका प्रतिशत होती है। दरें आमतौर पर 5–7% के बीच होती हैं, कुछ शहरों में अतिरिक्त उपकर लगता है और कई राज्यों में महिला खरीदारों को छूट मिलती है। पंजीकरण शुल्क आमतौर पर मूल्य का लगभग 1% होता है, कभी-कभी अधिकतम सीमा के साथ।
सही दर कहाँ देखें
मौजूदा दर और रेडी रेकनर मूल्य के लिए अपने राज्य के पंजीकरण विभाग की वेबसाइट देखें (जैसे IGR महाराष्ट्र, या दिल्ली और उत्तर प्रदेश के ई-पंजीकरण पोर्टल)। दरें बदलती रहती हैं, इसलिए खरीद के समय ही जाँचें।
सुझाव
- स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण को शुरू से ही बजट में जोड़ें, क्योंकि बैंक आमतौर पर इन्हें फ़ाइनेंस नहीं करते।
- कुछ राज्यों में महिला सह-मालिक के साथ संयुक्त पंजीकरण से स्टांप ड्यूटी कम हो सकती है।
- पंजीकृत दस्तावेज़ संभालकर रखें। लोन, दोबारा बिक्री और दाखिल-खारिज के लिए इसकी ज़रूरत होती है।
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